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कार्य क्षेत्र

परिवार एवं उत्तराधिकार

वसीयत, प्रोबेट और उत्तराधिकार, वैवाहिक विवाद, भरण-पोषण और संरक्षकता।

परिवार और उत्तराधिकार के मामले मुख्यतः स्वीय विधि (पर्सनल लॉ) द्वारा शासित होते हैं, अर्थात वह क़ानून जो किसी व्यक्ति के धर्म के अनुसार, या जिस क़ानून के अंतर्गत विवाह संपन्न हुआ उसके अनुसार लागू होता है, साथ ही भरण-पोषण, संरक्षकता और घरेलू हिंसा पर सामान्य अधिनियम भी लागू होते हैं।

इस क्षेत्र में क्या आता है

वसीयत

वसीयत और कोडिसिल (वसीयत का पूरक पत्र) का प्रारूपण। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (Indian Succession Act) के अंतर्गत वसीयत पर वसीयतकर्ता के हस्ताक्षर होने चाहिए और कम से कम दो गवाहों द्वारा उसका अनुप्रमाणन होना चाहिए। वसीयत का पंजीकरण वैकल्पिक है, यद्यपि इससे बाद में दस्तावेज़ को सिद्ध करने में सहायता मिल सकती है।

प्रोबेट और उत्तराधिकार

प्रोबेट और प्रशासन-पत्र (लेटर्स ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन) के लिए आवेदन, तथा किसी मृत व्यक्ति द्वारा छोड़े गए ऋणों और प्रतिभूतियों के लिए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 372 के अंतर्गत उत्तराधिकार प्रमाणपत्र। वसीयत न होने पर उत्तराधिकारी और उनके हिस्से उस स्वीय विधि पर निर्भर करते हैं जो मृत व्यक्ति पर लागू थी।

वैवाहिक विवाद

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (HMA), विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और अन्य स्वीय विधियों के अंतर्गत तलाक, न्यायिक पृथक्करण, दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना और आपसी सहमति से तलाक, तथा घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत कार्यवाही।

भरण-पोषण

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 144 (पूर्व में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125) और हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के अंतर्गत पति/पत्नी, बच्चों या माता-पिता द्वारा भरण-पोषण के दावे, तथा वैवाहिक कार्यवाही में अंतरिम और स्थायी भरण-पोषण।

संरक्षकता और अभिरक्षा (कस्टडी)

संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 (Guardians and Wards Act) और हिंदू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम, 1956 के अंतर्गत नाबालिगों की संरक्षकता और अभिरक्षा, जहाँ बच्चे का कल्याण सर्वोपरि विचार होता है।

परिवार न्यायालय और मध्यस्थता

जहाँ परिवार न्यायालय अधिनियम, 1984 के अंतर्गत परिवार न्यायालय स्थापित हैं, वे अपने क्षेत्र के वैवाहिक, भरण-पोषण और अभिरक्षा के मामले सुनते हैं। ये न्यायालय समझौते को प्रोत्साहित करते हैं, और कई मामले सुनवाई से पहले या उसके साथ-साथ मध्यस्थता के लिए भेजे जाते हैं।

पहली भेंट में सहायक काग़ज़ात

  • विवाह प्रमाणपत्र या विवाह का प्रमाण, और पहले की कोई भी याचिकाएँ या आदेश
  • उत्तराधिकार के लिए: मृत्यु प्रमाणपत्र, वंशावली, वसीयत (यदि हो) और संपत्तियों की सूची
  • भरण-पोषण के मामले में आय और व्यय का विवरण

मंच

मामले के अनुसार, इस क्षेत्र की कार्यवाही सामान्यतः इनके समक्ष होती है:

  • परिवार न्यायालय
  • जिला एवं सत्र न्यायालय और सिविल जज के न्यायालय
  • न्यायिक एवं उपखंड न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय
  • उड़ीसा उच्च न्यायालय, कटक
  • लोक अदालत और मध्यस्थता केंद्र

सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं। प्रत्येक मामला अपने तथ्यों और दस्तावेज़ों पर निर्भर करता है, और कानून तथा आधिकारिक प्रक्रियाएँ बदलती रहती हैं। कोई कदम उठाने से पहले संबंधित कार्यालय से वर्तमान स्थिति की जाँच करें, या अपने तथ्यों पर सलाह लें।

कानूनी मार्गदर्शिकाएँ

संबंधित प्रश्न

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संपर्क

संपर्क विवरण

पटिया, भुवनेश्वर में पूर्व समय लेकर भेंट।