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कार्य क्षेत्र

आपराधिक मामले

ज़मानत, विचारण (ट्रायल) में प्रतिनिधित्व, तथा आपराधिक अपील और पुनरीक्षण।

1 जुलाई 2024 से भारत में आपराधिक क़ानून भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) द्वारा शासित है, जिन्होंने भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) का स्थान लिया। पुराने क़ानूनों के अंतर्गत शुरू हुए मामले अब भी उन्हीं से शासित हो सकते हैं, इसलिए सबसे पहले यह जाँचना होता है कि कौन-सा क़ानून लागू है।

इस क्षेत्र में क्या आता है

ज़मानत

मजिस्ट्रेट, सत्र न्यायालय और उड़ीसा उच्च न्यायालय के समक्ष ज़मानती और ग़ैर-ज़मानती अपराधों में ज़मानत; अग्रिम ज़मानत (BNSS की धारा 482, पूर्व में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438); और डिफ़ॉल्ट ज़मानत, जहाँ क़ानून द्वारा अनुमत अवधि में अन्वेषण पूरा न हो।

विचारण (ट्रायल) में प्रतिनिधित्व

मजिस्ट्रेट के न्यायालयों, सत्र न्यायालय और विशेष न्यायालयों, जैसे POCSO और NDPS अधिनियमों के अंतर्गत न्यायालय तथा सतर्कता (विजिलेंस) न्यायालय, के समक्ष उपस्थिति और आरोप तय होने से लेकर साक्ष्य, प्रतिपरीक्षा और अंतिम बहस तक पूरे विचारण में प्रतिनिधित्व।

आपराधिक अपील और पुनरीक्षण

दोषसिद्धि या दंडादेश के विरुद्ध अपील, सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय के समक्ष आपराधिक पुनरीक्षण, तथा उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों के अंतर्गत याचिकाएँ (BNSS की धारा 528, पूर्व में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482)।

गिरफ़्तारी पर अधिकार

  • गिरफ़्तार व्यक्ति को गिरफ़्तारी के आधार बताए जाने चाहिए और वह अपनी पसंद के अधिवक्ता से परामर्श कर सकता है (संविधान का अनुच्छेद 22)।
  • गिरफ़्तार व्यक्ति को यात्रा का समय छोड़कर 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।
  • हिरासत में रखे गए व्यक्ति विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के अंतर्गत निःशुल्क विधिक सेवाओं के हक़दार हैं।

पहली भेंट में सहायक काग़ज़ात

  • एफआईआर या शिकायत की प्रति, और प्राप्त कोई भी नोटिस
  • गिरफ़्तारी ज्ञापन (अरेस्ट मेमो), रिमांड या ज़मानत आदेश, और आरोप पत्र यदि दायर हुआ हो
  • मामले में पहले के कोई भी आदेश

मंच

मामले के अनुसार, इस क्षेत्र की कार्यवाही सामान्यतः इनके समक्ष होती है:

  • न्यायिक एवं उपखंड न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय
  • जिला एवं सत्र न्यायालय
  • विशेष न्यायालय (POCSO, NDPS, सतर्कता/विजिलेंस)
  • उड़ीसा उच्च न्यायालय, कटक: ज़मानत, अपील और पुनरीक्षण

सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं। प्रत्येक मामला अपने तथ्यों और दस्तावेज़ों पर निर्भर करता है, और कानून तथा आधिकारिक प्रक्रियाएँ बदलती रहती हैं। कोई कदम उठाने से पहले संबंधित कार्यालय से वर्तमान स्थिति की जाँच करें, या अपने तथ्यों पर सलाह लें।

कानूनी मार्गदर्शिकाएँ

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संपर्क

संपर्क विवरण

पटिया, भुवनेश्वर में पूर्व समय लेकर भेंट।